Tuesday, March 2, 2010
वोट
मर गए सारे लोग देश के बचे हैं खाली वोट
चालबाज़ सब नौकर चाकर मालिक आधे भोंट
पूरी कविता के लिए संपर्क करे
श्री जोशी जी आर्य समाज हिरन मगरी सेक्टर ४ उदयपुर
9460573829
Tuesday, October 27, 2009
OTHERS
आयुर्वेद कॉलेज की पुकार
विषम परिस्थितियों में चुनोतियों को स्वीकार करते हुए साथ चलने का आह्वान करती पंक्तिया हैं आप सभी के सहयोग ,समर्थन , आशीर्वाद व दुआ की आशा करता हु ,धैर्य से पढ़ना व एक-एक पंक्ति को ग्रहण करे यह हमारी माँ आयुर्वेद और संगठित युवा शक्ति को समर्पित हैं
This is dedicated to youth determination
who have deep commitment to make this science globally accepted & mainstreaming pathy of health sciences।
बाधाये आती hain आय घिरे प्रलय की घोर घटाए
पावो के निचे अंगारे ,सर पर बरसे यदि ज्वालाये
निज हाथो को हसते हसते आग लगा कर जलना होगा
कदम मिला कर चलना होगा-२
उजियारे में ,अंधकार में ,कल kachaar में ,बिच dhaar में
घोर घृणा में ,put प्यार में ,क्षणिक jeet में ,dirghaa हार में
जीवन के शत शत आकर्षक,अरमानो को ढालना होगा
कदम मिला कर चलना होगा -२
सम्मुख फेला अमर ध्येय पथ ,प्रगति chirantan कैसा
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,असफल सफल मनोरथ
सुब कुछ देकर कुछ न maangate ,पावस bankar dhalna होगा
कदम.....
dhyan से पढ़ना
कुश काटो से संचित जीवन,प्रखर प्यार से वंचित योवन
niravata से मुखरित मधुवन,पर हित को अर्पित अपना तन-मन
जीवन को shat -शत आहुति में जलना होगा गलना होगा
कदम.....
पढने वाले मेरा दोस्तों esa कहकर के सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही यह तस्वीर बदलनी चाहिए ,और आयुर्वेद की तस्वीर बदलने vale मेरे मित्रो को ahwan करना chahata हु की बदलने के लिए ,परिवर्तन के लिए ज़िन्दगी नही पीढियों की कुर्बानी देनी पड़ती हैं और कुर्बानी की आज जरुरत हैं क्यूंकि ....
कोटि कोटि पुत्रो की माता पीड़ित ,अपमानित हैं
जो जननी का दुःख न मिटाए उन पुत्रो पर लानत हैं
लानत हैं उनकी भरी जानी पर जो पापियों के चरण धो रहे हैं
koti koti ...
ह्रदय ह्रदय में एक आग हैं,कंठ कंठ में एक राग हैं
एक ध्येय हैं एक स्वप्न ,लोटना माँ का swarnim गौरव हैं
और मुझे विश्वास हें
परम्परा का यह प्रवाह हैं कभी न खंडित होगा
पुत्रो के बल पर ही माँ का मस्तक मंडित होगा
वह कपूत हैं जिसके रहते माँ की deen दशा हो
shat भाई का घर ujadata जिसका महल बना हो
परम्परा का यह...
एक हाथ में srujan ,दुसरे में प्रलय लिए चलते हैं
वे कीर्ति jwala में जलते,हम अंधियारों में जलते हैं
आँखों में वैभव के सपने ,पग में तुफानो की गतिहो
आयुर्वेद का jwaar न रुकेगा aaye जिस जिस की हिम्मत हो
आए जिया-जिस की हिम्मत हो
गर्व से कहो हम अयुर्वेदियन हैं
I proud to be an Ayurvedian
We proud to be an Ayurvedian
Jai Bharat-Jai Ayurveda
Thursday, April 16, 2009
आज मैं बहुत खुश हु
आज मैं बहुत खुश हु
आज एक कल्पित संशयात्मक नकारात्मक भाव को मैंने जीत लिया
आज रिश्तो को तोड़ने वाले सबसे बड़े कारन अहम् व संवादहीनता को मैंने जीत लिया
................बस इसलिए खुश हु
क्यू खुश हु बता नही सकता
बस खुश हु महसूस कर सकता हु
की आज मैं बहुत खुश हु
आज एक बेटी के अपने बाबा को लिखे ख़त की पंक्ति "मुझे किसी ने नही कहा चलो कोई बात नही एक बार फिर से शुरुआत करते हैं यही ज़िन्दगी हैं "ने मेरे क्षुद्र भाव को जीत लिया
आज मैंने श्रीमद भगवद गीता के श्लोको से अपने मन के अंतर्द्वंद को जीत लिया
................बस इसलिए खुश हु
क्यू खुश हु बता नही सकता
बस खुश हु महसूस कर सकता हु
की आज मैं बहुत खुश हु
किसी किसी चीज को ज्यादा ही बारीकी से सोचने का जो लकवा हो जाता हैं ,आज मैं उस बीमारी को जीत गया
आज मेरा स्पष्टवादी ,बहिर्मुखी, अभिव्यंजक होना ,मेरा पाथ्यक्रमोतर किताबे पढ़ना ही मेरे काम आ गया
और आज मैं अपने आप को जीत गया
................बस इसलिए खुश हु
क्यू खुश हु बता नही सकता
बस खुश हु महसूस कर सकता हु
की आज मैं बहुत खुश हु
Thursday, April 9, 2009
I can't understand.....
I can’t understand……………..
My computer is going on today
It will hurt me but I will be kept scraping you from cyber café
Why? I’ll do so
I can’t understand.....
I am outspoken
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I do social works
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I do jokes
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I am very lazy at food
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I read out of syllabus books
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I sail in more than two boats
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I am miser at spending money on foods
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I spend money on others
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I have photogenic face but very slim body
Sometime it hurts
But I can’t stress on it
Why? I can’t understand.....
I know, what I not to do, but I do
Sometime it hurts
But it happens
Why? I can’t understand.....
I know you’ll never scrap me
But I’ll be kept scrapping from cyber café even
Why I’ll do so
I can’t understand……….....................
Sunday, March 29, 2009
दोस्तों की भीड़ में..............
दोस्तों की भीड़ में ......................
दोस्तों की भीड़ में दोस्ती ko तरसा हु
जिंदा हु फिर भी ज़िन्दगी को तरसा हू........
sochta हू उस फरिश्ते के बारे में तो
उसकी दोस्ती ke liye तरसा हू.....
सुना था सच्ची दोस्ती धीरे बढ़ने वाले पोधे की तरह होती हे
पर में तो उस पोधे को सिचने के लिए तरसा हू.....
कहते हे मुसीबत दोस्ती की कसौटी होती हे
पर में तो हर लम्हा us मुसीबत को ही तरसा हू .....
सपना था हर लम्हे में उन जेसे दोस्त मिलेंगे
पर में तो हर लम्हा उन लम्हे की तरसा हू.....
जुबा से नम लेते आंसू चालक आते हे
कभी हजारो बात किया करते थे आज एक बात को तरसा हू .....
दोस्ती में दोस्त, दोस्त का rab होता हे एहसास तो तब होता जब वो जुदा होता हे
हर लम्हा में उस जुदाई को तरसा हू .....
याद करते हे उनको तो यादो से दिल भर आते हे
कभी साथ जिया करते थे औब आज मिलने को तरसा हू.....
नन्ही सी पोटली विश्वास की जो थमाई थी चुपके से
चमक भरी आँखों के साथ हमराज बुनकर आज फिर उसी पोटली को पाने को तरसा हू .....
Dosto की भीड़ में dosti ko तरसा हू
जिन्दा हू फिर भी ज़िन्दगी को तरसा हू............
गुल हो मगर............
गुल हो मगर न खार हो ऐसा नही होता
दुनिया में सिर्फ़ प्यार हो ऐसा नही होता.......
इस ज़िन्दगी में गम की अहमयित भी कम नही
हर dam गुल-ऐ-गुलज़ार हो ऐसा नही होता......
नाकामियां इंसा को दिखाती हे नए रह
लेकिन हमेशा हर हो एसा नही होता.......
बेशक हमारा पास ज़माने भर का हुनर हो
हर कोई तलबगार हो ऐसा नही होता......
कुछ लोग हे जो दर्द छुपाते हे दिलो में
सबको गमो से प्यार हो ऐसा नही होता......
मिल जाए अगर एक इंसा तो बहुत हे
सारा जहा यार हो ऐसा नही होता......
हिम्मत हे नन्हे परिंदे के जिगर में
फिर अस्मा पर नही हो ऐसा नही होता.......
चाहने पर भी..................
चाहने पर भी...........
चाहने पर भी किसी गलती की सजा की माफी न मिले
चाहे ज़िन्दगी भर माफ किया हो ......
चाहने पर भी किसी गलती सजा की माफी न मिले
चाहे ज़िन्दगी भर माफ किया हो.......
चाहने पर भी दो शब्द तरंगे सहानुभूति की न मिले
चाहे ज़िन्दगी भर सहनुभुतिया दी हो.............
घुट घुट कर हल बेहाल हो जाए पर कोई मनाने वाली आवाज़ न हो
चाहे ज़िन्दगी भर लोगो को मनाया हो...........
चाहत हो खुल कर हसने की पर साथ कोई हसने वाली ताल न हो
चाहे ख़ुद पागल बनकर लोगो हसाया हो......
चाहने पर भी उनसे एक घरी त्याग की न मिले
चाहे उनके खुशी के लिए ज़िन्दगी भर त्याग किया हो........
चाहने पर भी कुछ पल उनकी दोस्ती न मिले
चाहे उनकी dostiके लिए ज़माने भर की दोस्ती ka त्याग किया हो......
चाहने पर भी कुछ पल उनकी नाज्किया न मिले
चाहे उनको नज्दिकिया देने के लिए ज़माने भर की नाज्कियाओ का त्याग किया हो.....
चाहने पर भी गम अपना भुलाने को उनकी एक बात न मिले
चाहे गम उनका भुलाने को ज़माने भर की बातो का त्याग किया हो.....
फिर भी................
चाहने पर भी गिला-शिकवा (shikawayat) एक पल न हो
चाहे वो ज़िन्दगी भर गिला-शिकवा करते रहो......
फिर भी.....................
फिर भी तुम्हे अनवरत अपने पथ पर चलते जाना हैं
चाहे जिन्दीगी यु ही इम्तिहान लेती रहे
तुम्हारा लक्ष्य अटल,मन स्थिर,परिश्रम हिमालय सा हो............
